दुनिया भर में माना जाता है कि नवजात शिशुओं को मीठा पानी चटाने से उनका दर्द कम होता है, लेकिन एक नई रिपोर्ट का कहना है कि वास्तव में ऐसा नहीं होता. रिपोर्ट विज्ञान पत्रिका द लांसेट में प्रकाशित हुई है.
2001 में कई परीक्षणों के बाद डॉक्टरों ने सलाह दी थी कि नवजात शिशुओं को मुंह में मीठा पानी देना चाहिए ताकि प्रजनन की प्रक्रिया में हुआ दर्द कम हो सके. लेकिन इस मामले में किए गए नए अध्ययन दिखाते हैं कि चीनी दिमाग या स्पाइनल कोर्ड में दर्द के संकेत भेजना कम नहीं करती बल्कि सिर्फ शिशुओं के चेहरे के भाव बदल देती है जिसकी वजह से ऐसा गलत आभास होता है कि दर्द कम हो रहा है.
यूनीवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन की रेबेका स्लैटर और उनकी साथियों ने 59 नवजात शिशुओं की एड़ी में सूई चुभोई और उसके बाद इलेक्ट्रोड कैप की मदद से दिमाग और रीढ़ में दर्द को मॉनीटर किया. नवजात शिशुओं के खून का सैंपल लेने के लिए उनकी एड़ी में यूं भी सूई चुभोई जाती है.
उसके बाद शिशुओं की जीभ पर उबला पानी या मीठे पानी का घोल डाला. दोनों ही स्थिति में दर्द की गतिविधियों में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया. स्लैटर की टीम का कहना है, "मीठे पानी की पीड़ा हरने वाली कार्रवाई के प्रमाण काअभाव और साथ ही बार बार मीठा पानी देने के दूरगामी लाभ पर अनिश्चितता दिखाती है कि और अध्ययन किए बिना शिशुओं में प्रजनन प्रक्रिया में होने वाले दर्द के मामले में सुक्रोज का आम प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए."
रिपोर्ट: एएफपी/महेश झा
संपादन: एस गौड़