1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

ताना बाना

'लश्कर ए तैयबा पर ध्यान दे अमेरिकी सरकार'

अमेरिकी सरकार के धड़ों ने चेतावनी दी है कि सरकार को लश्कर ए तैयबा गुट पर ध्यान देना चाहिए. वहीं भारतीय गृहमंत्री का कहना था कि पाकिस्तानी चरमपंथी गुटों को वहां आईएसआई का सहयोग मिल रहा है.

भारत के गृहमंत्री पी चिदंबरम और पाकिस्तान के उच्चायुक्त शाहिद मलिक के बीच बातचीत के दौरान चिदंबरम ने कहा कि पाकिस्तान की सभी चरमपंथी गुटों को आईएसआई का सहयोग मिल रहा है. यह कोई राज़ नहीं है कि पाकिस्तान में सभी चरमपंथी गुटों को आईएसआई का सहयोग मिल रहा है. गृहमंत्री ने इसमें लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद जैसे कई कई गुटों का नाम लिया.

उधर अमेरिका में प्रतिनिधि सभा में मध्यपूर्व और दक्षिण एशिया के लिए बनाई गई कमेटी के अध्यक्ष गैरी एकरमैन का कहना था कि "चरमपंथी लोगों के इस गुट को पूरी तरह से ख़त्म किया जाना चाहिए."

लश्कर चरमपंथियों के बारे में एक बैठक के दौरान एकरमैन का कहना था, "एलईटी चरमपंथी विचारधारा वाले लोगों का गुट है. उनके पास पैसे का अच्छा प्रबन्ध है, वे बहुत महत्वाकांक्षी हैं और सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि पाकिस्तानी सेना उन्हें सहन करती है और उसके साथ एलईटी जुड़ा हुआ है."

बताया जाता है कि दक्षिण एशिया में लश्कर ए तैयबा गुट के पास धन की अच्छी व्यवस्था है और यह सबसे बड़ा गुट है. भारत से कश्मीर में लड़ने के लिए पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी इसे सहयोग देती है.

पाकिस्तान में लश्कर ए तैयबा को हाल ही में बैन किया गया है. ख़ासकर 2001 में संसद पर हमले में इसका नाम आने के बाद से. लेकिन कई जानकारों का कहना है कि इसे पाकिस्तान में अब भी चुपचाप सहयोग मिल रहा है क्योंकि यह गुट पाकिस्तान में हमले नहीं करता. 2008 में मुंबई हमलों में भी इस गुट के शामिल होने का आरोप है. एकरमैन का दावा था कि "पाकिस्तान में लश्कर ए तैयबा की समाज में साफ़ उपस्थिति दिखाई पड़ती है क्योंकि कई गांवों में ग़रीब लोगों के लिए वह निस्वार्थ और मुफ़्त सेवाएं देता रहता है."

एकरमैन का यह भी कहना था कि "अनुमान है कि कम से कम दो हज़ार पाकिस्तान गांवों में एलईटी के ऑफ़िस हैं."

पाकिस्तान ने हाल ही के दिनों में तालिबान के ख़िलाफ़ कार्रवाई में साथ दिया है लेकिन अमेरिकी अधिकारी इससे नाराज़ हैं कि यह कार्रवाई लश्कर जैसे गुटों के ख़िलाफ़ अब भी नहीं की जा रही है.

पाकिस्तानी अमेरिकी डेविड हेड़ली की मुंबई मामले में गिरफ़्तारी के बाद से अमेरिका का ध्यान लश्कर ए तैयबा गुट पर गया है. हेडली पर आरोप हैं कि उसने मुंबई में हमला करने वाले चरमपंथियों की सहायता की. शिकागो में उस पर सुनवाई चल रही है. वहीं पाकिस्तान में पैदा हुए शिकागो के व्यापारी तहव्वुर राणा को भी इस मामले में गिरफ़्तार किया गया है.

पाकिस्तान मामलों की जानकार लिज़ा कुर्टिस का कहना है कि अमेरिका को एलईटी से निपटने के लिए ख़ास नीति बनानी चाहिए. "पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसियों का एलईटी पर कितना नियंत्रण है यह एक खुला सवाल है." वहीं एक अन्य जानकार एश्ले टेलिस का कहना है कि इस्लामाबाद कभी एलईटी को बाहर करना चाहता ही नहीं था क्योंकि एलईटी उसके दुश्मन भारत के ख़िलाफ़ पाकिस्तानी सेना के अभियान को फैलाने में मदद करता है.

रिपोर्टः एजेंसियां/आभा मोंढे

अन्य खबरें